शनिवार, 12 अक्तूबर 2013

बच्चों पर ना थोपें डर.

 अपने बच्चे के साथ पालक  शिक्षक मीटिंग में आयीं वे बहुत चिंतित थीं।  "मेम मेरा बेटा मैथ्स में बहुत कमजोर है आप ही बताइए उसे कैसे करवाऊं? आप उस पर विशेष रूप से ध्यान दीजियेगा ,उसे रोज़ कुछ एक्स्ट्रा होमवर्क दे दिया करिए। " 
मैं  ने कुछ असमंजस में उस बच्चे की ओर  देखा , जहाँ तक मुझे याद  था बच्चा मैथ्स में अच्छा कर रहा था। हाँ थोड़ी झिझक थी लेकिन कमजोर नहीं कहा जा सकता था।  मैंने अपने रजिस्टर में उसके नंबर देखे वह ठीक ठाक नंबरों से पास हुआ था।  
माँ की बातें सुनकर वह संकोच से भर गया उसकी आँखों में एक झिझक ,एक भय झलकने लगा।  मैंने उससे पूछा -"बीटा मैथ्स में कोई दिक्कत है ? आपको समझ में आता है ? 
उसने धीरे से सिर हिलाया और बोल हाँ।  
मैंने उसकी मम्मी से पूछा आप बताइए ऐसी कोई दिक्कत जो बच्चा आपसे बताता हो , उसे समझने में कोई परेशानी है या कोई और बात। 
वे बोलीं ऐसी तो कोई बात नहीं है ,वो मुझे कुछ बताता भी नहीं है ,जब भी उसे मैथ्स करने को कहती हूँ कहता है मैंने सब काम स्कूल में ही कर लिया। घर पर तो मैथ्स पढना ही नहीं चाहता।  
मैंने एक  रजिस्टर पलटा उसके ग्रेड्स देखे होम वर्क और कॉपी जमा करने में उसे ए ग्रेड था मतलब उसका काम पूरा रहता है और वह कॉपी भी समय पर जमा करवाता था। 
मैंने उन्हें समझाते हुए कहा देखिये आपका बच्चा क्लास में जो पूछा जाये उसका जवाब भी देता है , उसका काम पूरा रहता है कॉपी टाइम पर चेक करवाता है मुझे नहीं लगता कि वह मैथ्स में कमजोर है। 
वे धीरे से बोलीं "मेम दरअसल बात ये है कि इसके पापा को बिलकुल टाइम नहीं मिलता और मेरा मैथ्स बहुत कमजोर है इसलिए मैं इसे पढ़ा नहीं पाती हूँ। ये क्या करता है मुझे नहीं पता लेकिन हाँ जब भी पढने बैठाओ मैथ्स से जी चुराता है इसलिए मुझे बहुत चिंता होती है।"  
ओह्ह तो ये बात है दरअसल बच्चा नहीं ,बच्चे की माँ मैथ्स में कमजोर है और वह अपना डर बच्चे पर उंडेल रही हैं ,इसलिए बच्चा अब घर पर मैथ्स नहीं करना चाहता।  
ये तो सिर्फ एक बानगी है ऐसे कई माता पिता हैं जो अपने डर बच्चों पर उंडेल कर उसकी ओट ले लेते हैं।  
ये सच है कि बच्चे माता पिता का प्रतिरूप होते है लेकिन इसके अलावा भी वे एक स्वतंत्र व्यक्तित्व होते हैं। उनकी अपनी अभिरुचि होती हैं। जरूरी तो नहीं कि अगर माँ मैथ्स या इंग्लिश में कमजोर रही हो तो उसका बच्चा भी इन विषयों में कमजोर होगा।  दरअसल ऐसे माता पिता बच्चों के माध्यम से अपनी कमजोरी पर पर्दा डाल कर खुद को एक ओट देना चाहते हैं।  जब वे बच्चे को बार बार वही विषय पढ़ने को कहते हैं जिसमे उन्हें सबसे ज्यादा डर लगता है। अपने डर को उस विषय की कठिनता से जोड़ कर वे बच्चे को उस विषय में अग्रणी देखना चाहते हैं इसमे कोई दो राय नहीं है। लेकिन कई बार इसका उल्टा असर होता है।  बच्चा बार बार कठिन विषय है ज्यादा पढो सुनते सुनते परेशान हो जाता है और या तो उस विषय से खुद ही खौफ खाने लगता है या घर में मम्मी पापा के सामने उस विषय को पढ़ने से कतराने लगता है।  
मैंने कई ऐसे बच्चे देखे हैं जो मैथ्स में अच्छे थे लेकिन कहते थे कि मैं मैथ्स में कमजोर हूँ , उनके लिए ट्यूशन लगी है लेकिन फिर भी उनका आत्मविश्वास नहीं बन पाता क्योंकि वे हमेशा अपने माता पिता से सुनते रहे हैं कि फलां विषय बहुत कठिन है ठीक से पढो। ऐसे में विषय में ठीक होते हुए भी बच्चे के मन में एक डर बैठ जाता है।  

अगर आपको किसी विषय से डर लगता है तो उस पर काबू पाने की कोशिश करिए , अगर हो सके तो बच्चे के साथ ,उसकी किताबों की मदद से उस विषय को पढ़ने ,समझने की कोशिश करें लेकिन अपना डर बच्चों पर ना थोपें उन्हें अपनी कमजोरियां और खूबियाँ खुद बनाने और पहचानने दीजिये।  
kavita verma 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (13-10-2013) आँचल में है दूध : चर्चा मंच -1397 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ji bahut bahut abhar ..

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  2. बहुत सुन्दर लेख ..अच्छे भाव और सीख के साथ
    आप सभी मित्रों को सपरिवार दशहरा की हार्दिक शुभ कामनाएं

    भ्रमर ५

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  3. सभी घरों में निर्नित आम समस्या पर सहज और सुंदर ढंग से कविता जी आपने प्रकाश डाला है। माता-पिता हमेशा अपने आंखों से बच्चों को परखने की कोशिश करते हैं। वैसे उनका भय, चिंता और उद्देश्य गलत होता नहीं पर अनावश्यक फिक्रमंदी के कारण सब गडमड होती है। खासतौर पर यह समस्या शहरी माता-पिता और बच्चों की है। ग्रामीण माता-पिता को बच्चा स्कूल में क्या कर रहा है पता ही नहीं होता है। बस उन्हें बच्चे के पास-फेल से मतलब होता है। सुंदर लेख।

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  4. ऐसे ही अनुचित दबावों के चलते बच्चों में किसी भी विषय के प्रति अरुचि हो जाती है -अच्छा दृष्टांत

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